Friday, October 17, 2025

हर पल तेरा



हर पल तेरा इंतजार है,
मानो या न मानो, तुम्हें मुझसे प्यार है।

दिन बदलते हैं, मौसम बदलते हैं,
लेकिन जो न बदले, वो तेरा प्यार है।

ऐ हसीन, गुल बदन, जाने मन, जाने चमन,
तुम हो इतनी प्यारी, जिया बेकरार है।

क्या था गुनाह जो ये सज़ा मिली,
मुझसे मेरी जिंदगी छिनी।

तेरी याद में कटते हैं पल,
हर धड़कन अब तुझसे ही।

तुम बिन सूना है ख्वाब मेरा
तुम से ही रोशन हैं हर खुशी।

तेरी हँसी में बसता है जहाँ,
तेरी बातों में इश्क़ सारा
हर साँस में बस तेरा नाम
 खामोशी में एहसास तेरा 


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बंद आंखों में



बंद आँखों में रोते हैं आँसू मेरे,
चुप रहते हैं, कुछ नहीं कहते हैं आँसू मेरे।

रात की खामोशी में गूँजते हैं फसाने,
दिल के जख्मों में छुपे रहते हैं आँसू मेरे।

हँसी भी नकली, बातें भी अधूरी,
हर पल मेरे पास आते हैं आँसू मेरे।

कभी खुद से पूछते हैं, ये क्यों हैं बसे,
कहीं खो जाते हैं, फिर लौट आते हैं आँसू मेरे।

खामोशियों में बिखरे यादों के फसाने,
हर मोड़ पर मिलते हैं आँसू मेरे।

कुछ ख्वाब अधूरे, कुछ बातें अधूरी,
रात की खामोशी में गूँजते हैं आँसू मेरे।

दिल की गहराई में छुपा हर सवाल,
हर खामोशी में मिलते हैं आँसू मेरे।

जब भी हँसता हूँ, छुपा होता है कोई ग़म,
हर मुस्कान के पीछे छिपते हैं आँसू मेरे।


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बनारस की रूह




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🌸 बनारस की रूह 🌸

गंगा किनारे पान के सहारे,
ये जीवन कट जाना है,
गुरु एक बात हमार जान ला,
एक रोज माटी में मिल जाबा।

गोदौलिया की भीड़ में घूमें,
ठठेरी में गिलास चमकावे,
विश्वनाथ गलियों से गुज़रे,
हर हर महादेव गूँज सुनावे।

दशाश्वमेध पे आरती झिलमिल,
दीया बहे तो मन संभल जाए,
मणिकर्णिका बोले सच्चाई,
जीवन-मृत्यु संग मिल जाए।

लस्सी मारे मलाई की परत,
पान में इलायची मुसकाए,
बनारस है मस्त फ़कीराना,
यहाँ हर दुख भी गीत बन जाए।


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गंगा किनारे बैठे-बैठे,
सोचें काया का मोल भला,
आया था खाली हाथ यहाँ,
अब सब यहीं छोड़ चलब भला।

मणिकर्णिका की लपटों में,
सत्य का दीदार हुआ,
जीवन-मृत्यु का फ़र्क मिटा,
बस “हर हर महादेव” पुकार हुआ।

घंटों की गूँज में शांति मिले,
धूप-दीप की सुगंध समाई,
काशी की गलियों में प्रभु बसे,
हर मन में उनकी छवि समाई।

अब न कोई मोह रहे, न माया,
बस गंगाजल की धार बहे,
जहाँ भस्म उड़ती, वहाँ मुक्ति है,
यही बनारस की राह रहे।


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आशिकी




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कह दो आज हवाओं से,
न करे दिल्लगी,
छेड़े न मुझे अभी,
अभी-अभी हुई है आशिकी।

तेरी यादों की खुशबू है पास,
हर सांस में बसा है तेरा एहसास।
बारिश की बूँदों में तेरा नाम लिखा,
चाँदनी भी अब तेरे नाम से महका।

हवा भी गुनगुनाए तेरी बातें,
मेरी धड़कन कहे ये सारी रातें।
तेरी हँसी से खिलते हैं ये फूल,
तेरी नज़रों में बसा मेरा जूल।

सन्नाटों में तेरी आवाज़ गूँजती,
हर ख़ुशी अब तेरे साथ जुड़ती।
तारों की चमक भी फीकी लगे,
जब तू मेरे ख्यालों में आए।

तेरे हाथों की गर्मी चाहिए मेरी बाहों को,
तेरे ख्वाबों की दुनिया सजती हमारी राहों को।
अब ये दिल बस तुझसे मिलने को तरसे,
तेरी मोहब्बत में ये दिल हमेशा डूबे।

कह दो आज हवाओं से,
न करे दिल्लगी,
छेड़े न मुझे अभी,
अभी-अभी हुई है आशिकी

ख्वाहिश

यूँ ही तो न जगी
इस दिल में ख़्वाहिशें,
देखा जो तुम्हें
ये दिल आ गया।

तेरी आँखों की चमक में
खो जाने को जी चाहता है,
तेरी हँसी की मिठास में
हर ग़म मिटा गया।

चाँद की नर्मी सी तेरी बातें,
सितारों की रोशनी जैसी तेरी आँखें,
बारिश की ठंडी बूँदों में
तेरा नाम गुनगुनाता है।

हवा के झोंकों में तेरी खुशबू,
सारा जहाँ मेरे पास आ गया,
तेरे प्यार की गर्मी में
हर जख्म भर गया।

तू जब पास हो मेरे,
हर पल जन्नत सा लगता है,
तेरे हाथों की गर्मी में
मेरी दुनिया पूरी लगती है।

चाँद, सितारे, बारिश और हवा
सब बस तेरी यादों में बसते हैं,
और मैं हर लम्हा, हर सांस
सिर्फ तेरा हो जाता हूं

हसरत

इस दिल की धड़कन

पे काबू नही

तेरी हसरत में

जान सभंलती नही

तेरे नाम की खुशबू
हर सांस में घुली,
तेरे बिना अब
ज़िंदगी चलती नहीं।

नज़रों में बस तेरा ही चेहरा,
ख़्वाबों में भी तू ही तू,
दिल ये पागल बोले सदा —
"मिल जाओ तुम, तो हो जाए सुकून।"

Wednesday, October 15, 2025

फिज़ा

नदिया का पानी बारिश की बूंदे
 कहती हैं तुझसे क्या बता
आजा मेरे संग दिखाऊं 
तुझे ये खूबसूरत फिज़ा

प्यार की नदियां दिल की धड़कन 
हर पल इक सपना नया 

सपनों में यादें तुम्हारी ही रहती
तुम बिन ये दुनिया कहां 

आंखों में तेरे मेरी जिंदगानी 
हाथों में हाथ तेरा

तेरे साथ हूं तो हर पल लगे हैं नया 
आंखों में तेरी जीवन मेरा

प्यार की बारिश 
सपनों की दुनिया 
आजा मेरे संग ज़रा 
नीला ये सागर क्या कह रहा है 
सुन ले दिल की सदा 

आवाज़ का संगीत तेरे 
छूता है दिल को मेरे 

संग संग चलेंगे 
नदिया किनारे तेरे

Friday, October 10, 2025

आज फिर दिल को

आज फिर दिल को तेरी याद आई
जो तूने कभी न की वो बात आई
एक मुद्दत से हमने छोड़ी थी दर्द में दवा ही काम आई
लोग कहते हैं मतवाली, मुझको तेरे सिवा दोस्ती कभी न निभाई
आज फिर दिल को तेरी याद आई

रात फिर दिल को क्यों उनकी याद आई
नींद तो उड़ गई, रह गई सपनों की तन्हाई
आंखों के सपनों से क्या है वास्ता, बंद आंखों से देखूं हर पल चेहरा तेरा

Wednesday, October 8, 2025

ग़म

मुझसे नाराज न हो जिन्दगी 

मेरे गम की नुमायश न कर

आदत है मेरी मुस्कुराने की

अपनी ख्वाहिश पर

हर पल तेरा

हर पल तेरा इंतजार है, मानो या न मानो, तुम्हें मुझसे प्यार है। दिन बदलते हैं, मौसम बदलते हैं, लेकिन जो न बदले, वो तेरा प्यार है। ऐ हसीन, गुल ...