Sunday, April 26, 2020

न खाऊंगा न ...

न खाऊंगा, न खाने दूंगा 
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मैं कुछ दिन पूर्व बस में जौनपुर से बनारस  का सफर कर रहा था।
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मेरे बाजू वाली सीट पर एक युवक और एक युवती बैठे थे।
दोनों एक दूसरे के लिए अजनबी थे।

थोड़े समय के बाद वे आपस में बातें करने लगे।
बातचीत उस मुकाम तक पहुँची जहाँ मोबाइल नंबर का आदान प्रदान होता है।

लड़के का मोबाइल किसी वजह से ऑफ था।

तो 

उसने अपनी जेब से एक कागज बरामद किया,लेकिन लिखने के लिए उसके पास पेन नहीं था।
बाजू की सीट पर बैठे हुए मेरा सारा ध्यान उन्हीं दोनों की तरफ था,  
इसलिए मैं समझ गया कि, लड़की का मोबाइल नंबर लिखने के लिए लड़के को पेन की जरूरत है।
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उसने बड़ी आशा से मेरी तरफ देखा...

मैंने अपनी शर्ट के ऊपरी जेब में लगाकर रखा हुआ अपना पेन निकाला 
और..

चलती हुई बस से बाहर फेंक दिया।
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और मन में शब्द आये कि
ना खाऊँगा, ना खाने दूँगा !!
 😐😂😂
Surendra Mohan Pathak
Westland Books
#Nabairinakoibegana

Friday, April 24, 2020

स्मृति

साल था 1986 बीआरपी इंटर कालेज में चुनाव हो रहा था राजेश श्रीवास्तव गुलगुल एक तेज तर्रार दबंग छात्र नेता थे चुनाव मैदान में थे उनके सामने दिवाकर शुक्ला,राजेश सिंह, सुभाष यादव भी मैदान में उतरे थे, राजेश भाई कालेज से सटे हुए मुहल्ले हुसैनाबाद के रहने वाले थे जहां के छात्रों की काफी संख्या कालेज में थी। कायस्थों का कालेज था तो स्वजातीय मतों का झुकाव भी राजेश भाई की तरफ था। चुनाव हुआ पर धांधली हुई और राजेश भाई चुनाव नहीं जीत सके लेकिन उसके बाद कोई भी कायस्थ बीआरपी कालेज में अध्यक्ष पद पर आसीन नही हुआ।

हर पल तेरा

हर पल तेरा इंतजार है, मानो या न मानो, तुम्हें मुझसे प्यार है। दिन बदलते हैं, मौसम बदलते हैं, लेकिन जो न बदले, वो तेरा प्यार है। ऐ हसीन, गुल ...