गया एक दोस्त के दावत में
उसने मुझे गैर एकलाखी रियाया समझा
खाना तो खिलाया सिफह
मगर शराब के काबिल न समझा
दस्तूरे मुहब्बत के अपने कायदे है
हमने मुहब्बत के सिवा कोई कायदा नही समझा
हर पल तेरा इंतजार है, मानो या न मानो, तुम्हें मुझसे प्यार है। दिन बदलते हैं, मौसम बदलते हैं, लेकिन जो न बदले, वो तेरा प्यार है। ऐ हसीन, गुल ...