Friday, August 23, 2024

काबिल

गया एक दोस्त के दावत में 
उसने मुझे गैर एकलाखी रियाया समझा 
खाना तो खिलाया सिफह 
मगर शराब के काबिल न समझा 
दस्तूरे मुहब्बत के अपने कायदे है 
हमने मुहब्बत के सिवा कोई कायदा नही समझा 

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