सबके भीतर बैठा है एक धर्म जाति का हिमायती
चाहे वो हिन्दू हो या फिर मुस्लिम
सिख हो या ईसाई
जिस दिन ये भाव मिट जायेगा
हिंदुस्तान बदल जायेगा
जाति की भावना से दबे हम
ऊंची जाति के झूठे दंभ
दूसरों को कमतर समझते
इंसानों में भेदभाव करते
ये देशप्रेम नहीं बल्कि देशद्रोह है
अपने देशवासियों से भेदभाव करते
अपने देश को कमजोर करते हैं
टुकड़ों में बंटकर कमजोर हो रहे हैं
अपने को जाति के कारण
ऊंचा समझना छोड़ दो
हर हिन्दुस्तानी से
बस प्रेम का नाता जोड़ लो
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