शिव की फीस बैंक में जमा कर के स्कूल आया हूं स्कूल वालों को कोई फार्म भरना है। काउंटर पर बैठे क्लर्क ने मुस्कुरा कर जरूरी डॉक्यूमेंट्स बताए तभी एक ऑफिस स्टाफ ने जो कि एक लड़की थी ने उस क्लर्क को आवाज़ दी और वह उठकर चला गया। क्लर्क नवजवान था आजकल प्राइवेट कंपनी या स्कूलों में नवजवान लोग ज्यादा रखे जाते हैं क्यूंकि ज्यादा उम्र वालों के पास उतनी एनर्जी नहीं होती। बहरहाल वो क्लर्क मुझे एक रजिस्टर लिए कैंपस में दिखा फिर देखते ही देखते वो स्कूल की सीढ़ी चढ़ने लगा। मैं खामोश बैठा उसका इंतजार करने लगा और मैं कर भी क्या सकता हूं। हम लोगों के वक़्त की क्या कीमत है लोअर मिडिल क्लास, एक ठप्पा लग गया है जिसकी कहीं कोई वकत नहीं है इसके लिए आपको कोई प्रभावशाली व्यक्ति होना चाहिए। जैसे कोई अधिकारी, बड़ा नेता, बड़ा माफिया, इन लोगों के बहुत कॉन्टैक्ट होते हैं लोग इनके आगे पीछे घूमते रहते हैं। मैं बैठा उस क्लर्क का इंतजार कर रहा था तभी एक युवक आया जो अभी 27,28 साल का लग रहा था वो अपनी बेटी के एडमिशन के लिए आया था बेटी इसी स्कूल में पढ़ती है यू के जी पास करके फर्स्ट में गई है लेकिन उससे पुनः एडमिशन के लिए एक हजार रूपए की फीस जमा करने को कहा। वह युवक क्षुब्ध होकर मेरे पास आकर बड़ बड़ाने लगा। मैंने उससे कहा कि यही सिस्टम है। इसी स्कूल में दो साल से पढ़ रही है अब कह रहे हैं कि एडमिशन फीस के एक हज़ार रुपए जमा करवाए। युवक क्षुब्ध होकर कह रहा था। मुझे भी दस साल पहले की याद दिला दी जब शिव यूकेजी से वन में गया था तो मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ था। मैं मुस्कुरा उठा।
जीवन कभी कभी आइना दिखा देता है। इस देश में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर कोई भी रोक नहीं लगाई जा सकती है पता नहीं चलता कि आखिर सरकार इनकी नकेल कसने में संकोच क्यूं करती है। मेरे एक दोस्त का कहना है कि सभी प्राइवेट स्कूल बड़े बड़े नेताओं के हैं मुझे लगता है कि वह सही कह रहा था।
हर अमीर आदमी और अमीर बनता जा रहा है और गरीब आदमी की दाल रोटी चलना मुश्किल है। सरकारें बदलती रहती हैं लेकिन गरीबों का हाल नहीं बदलता, कल का छुटभैय नेता देखते देखते बड़ी एसयूवी से चलने लगता है विधायक मंत्री बनने के बाद करोड़ों का घर बड़ी बड़ी गाड़ियां उसके पास साधारण ढंग से उपलब्ध हो जाती हैं। सरकार के बड़े विभाग इनकम टैक्स विभाग सीबीआई, भ्रस्टाचार मिटाने की बात करते हैं लेकिन इन मंत्रियों को कभी कोई दिक्कत नहीं होती है। शायद सैयां भए कोतवाल का मामला यही है।
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