ये हवायें भी कितनी अजीब है
कहती हैं ये कितना कुछ
कभी गुनगुनाती हैं कभी गाती हैं
जीवन इनके संग चलता रहता है
जब कभी सरगोशियों में
धीरे से कुछ कहकर
दिल को छूकर कभी चुप रहकर
जताती हैं मैं हूँ हर घड़ी तेरे संग संग
कोई खुशी हो या कोई गम
मौन नहीं रहती हर पल कुछ न कुछ कहती ही रहती
जब भी कभी दिल उदास हो
बैठो अकेले में न कोई पास हो
धीरे सहलाकर जीने ओ कहती रहती हैं
ये हवायें 2
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