आह्लादित होना एक शब्द है पर इसको वास्तविक अर्थ में महसूस करना बेहद अलग अनुभव है खासकर तब जब ये आपके बच्चों से जुड़ा हो। शिव के स्कूल का टूर बनारस किसी वाटरपार्क के लिये जा रहा था मैं सुबह साढ़े 6 बजे शिव को स्कूल लेकर पहुँचा। कुल 4 बसे स्कूल प्रशासन ने इंतजाम की थी पर बच्चे ज्यादा थे 200 के करीब लड़के और लड़कियां रहे होंगे। बच्चों की खुशी देखते ही बन रही थी,बच्चों को देखकर उनके पिता भी खुश थे पर एक चिंता एक डर हर पिता के चेहरे पर मैंने देखा। बस स्कूल कैम्पस से बाहर निकली, बच्चों की किलकारियों ने रोम रोम भिगो दिया। बच्चों की खुशी उनके आह्लाद ने रोमांचित कर दिया। शाम 7 बजे तक वापस आने का समय स्कूल प्रशासन ने बताया।
जब शाम 7 बजे मैं शिव को लिवाने गया तो वहाँ सब बच्चों के पिता या अभिवावक आये थे, बच्चों की किलकारियों से गूंजती उनके हर्षोलास से गूँजती बसे पहुंची तो बच्चों के अभिवावकों के चेहरे पर संतोष व खुशी को मैंने साफ महसूस किया आखिर यह सब मेरे भीतर भी चल रहा था कुछ पिता इतने खुश थे कि उन्होंने अपने बच्चों को गले लगा लिया। कुछ क्षण आपको भिगो देते है यह उनमे से एक था मेरे लिए।
सुंदर खूबसूरत क्षण जो कि एक पिता ही अनुभव कर सकता है।
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